परिसीमा:
भेदन/अभेदनात्मक आक्रमण, यौन उत्पीड़न, पोर्नोग्राफी, ऑनलाइन शोषण—सब शामिल। 18 से कम आयु को ''बालक'' मानकर आयु-आधारित सुरक्षा।
प्रक्रिया:
इन-कैमरा कार्यवाही, बयान के समय सहायक, पहचान-गोपनीयता, टाइमबाउंड सुनवाई हेतु विशेष न्यायालय, मेडिकल प्रोटोकॉल व क्षतिपूर्ति।
कर्तव्य:
शिक्षक/चिकित्सक/नागरिक द्वारा अनिवार्य रिपोर्टिंग; न करने पर दंड। पुलिस/सीडब्ल्यूसी के समन्वय से बाल-हित सर्वोपरि।
महत्त्व:
देशभर में एकरूप मानक बनकर भय-रहित रिपोर्टिंग, दोषियों पर त्वरित कार्रवाई और पुनर्वास-उन्मुख न्याय सुनिश्चित करता है।