चरण 1: अवधारणा साफ़ करें।
गैर-सरकारी संगठन/नागरिक समाज संस्थाएँ वे निकाय हैं जो राज्य के औपचारिक ढाँचे का हिस्सा नहीं होते—वे स्वतंत्र रूप से संगठित होकर जन-हित, विचार, सदस्यों के हित या सूचना के अधिकार के लिए काम करते हैं। उदाहरण: राजनीतिक दल (state से बाहर, पर सत्ता पाने/नीति-प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयत्न), हित समूह या प्रेशर ग्रुप (विशिष्ट हितों की पैरवी), और प्रेस/मीडिया (स्वतंत्र सूचना/विचार-व्तैयन का मंच)।
चरण 2: राज्य अंग पहचानें।
न्यायपालिका संविधान द्वारा स्थापित राज्य की स्वतंत्र शाखा है—अदालतें वैधानिक अधिकार से न्याय-निर्णयन करती हैं; यह सिविल सोसायटी का NGO/स्वैच्छिक निकाय नहीं है।
चरण 3: निष्कर्ष।
इसलिए दिए विकल्पों में न्यायपालिका ही वह इकाई है जो गैर-सरकारी संगठन नहीं है; बाक़ी तीनों नागरिक समाज/गैर-सरकारी क्षेत्र में आते हैं, भले उनके कार्य-क्षेत्र अलग हों।