निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत रस पहचानकर उनके नाम लिखिए (कोई दो):
• (१) माला फेरत जुग भया, गया न मन का फेर। कर का मनका डारि कैं, मन का मनका फेर।।
• (२) कहा-कैकयी ने सक्रोध दूर हट! दूर हट! निर्बोध! द्विजिव्हे रस में, विष मत घोल।
• (३) तू दयालु दीन हौं, तू दानि हौं भिखारि। हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप पुंजहारि।।
• (४) सिर पर बैठो काग, आँखि दोऊ खात खींचहि जीभहि सियार अतिहि आनंद उर धारत। गिद्ध जाँघ के माँस खोदि-खोदि खात, उचारत हैं।
करुण रस अथवा शान्त रस का लक्षण के साथ उदाहरण लिखिए।
शांत अथवा वात्सल्य रस की परिभाषा लिखकर उसका उदाहरण दीजिए।
'संयोग श्रृंगार' रस अथवा 'करुण' रस का लक्षण सहित एक उदाहरण लिखिए।
'विभाव' (विस्तारक) श्रृंगार रस अथवा 'करण' रस का संक्षेप में उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए।
हर्ष रस अथवा 'द्वार' रस का स्थायी भाव के साथ उदाहरण परिभाषा लिखिए।