दूध शीघ्र नष्ट होनेवाला खाद्य पदार्थ है क्योंकि यह बैक्टीरिया के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। दूध में प्राकृतिक रूप से पानी की उच्च मात्रा होती है, जो बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के लिए आदर्श परिस्थितियाँ उत्पन्न करती है। यह नमी की अधिकता बैक्टीरिया के विकास के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करती है, जिससे दूध जल्दी खराब हो जाता है। इसके अलावा, दूध में विभिन्न पोषक तत्व होते हैं, जैसे प्रोटीन, वसा, और शर्करा, जो बैक्टीरिया के लिए खाद्य स्रोत का काम करते हैं। इसलिए, दूध को जल्दी से जल्दी उपयोग में लाना या सही तापमान पर संग्रहित करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, ताकि यह खराब होने से बच सके।
वहीं, चना, मैदा, और चावल अधिक समय तक संरक्षित रहते हैं, क्योंकि इनमें नमी की कमी होती है, जो खराब होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
- चना (काबुली चना या उबला हुआ चना) में कम नमी होती है, जिससे बैक्टीरिया और अन्य रोगाणु इसके भीतर पनपने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसके अतिरिक्त, चना का कठोर आकार भी इसकी संरक्षिता को बढ़ाता है।
- मैदा में भी नमी की कमी होती है और यह सूखा होता है, जिससे इसमें बैक्टीरिया के लिए भोजन का स्रोत कम होता है। हालांकि, मैदा को अगर आद्र वातावरण में रखा जाए तो उसमें भी कीड़े लग सकते हैं, लेकिन आमतौर पर यह अधिक समय तक सुरक्षित रहता है।
- चावल भी सूखा होने के कारण नमी को अवशोषित करने में सक्षम नहीं होता और इसलिए यह लंबे समय तक खराब नहीं होता है। चावल के दानों में बहुत कम पानी होता है, जो खराब होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
इस प्रकार, दूध की ताजगी बनाए रखने के लिए उसे ठंडे स्थान पर रखना चाहिए, जबकि चना, मैदा और चावल को सूखे और ठंडे स्थान पर रखा जा सकता है, जो उनकी संरक्षा में मदद करता है और उन्हें खराब होने से बचाता है।