धारणा:
लिंग सामाजिक निर्माण है—भूमिकाएँ/अपेक्षाएँ शक्ति-संतुलन तय करती हैं। असमानता संस्थागत/सांस्कृतिक नियमों से पैदा होती है।
प्रमुख रूप:
स्कूल-त्याग/एसटीईएम में कमी, वेतन-अंतर, असुरक्षित/अनौपचारिक काम, संपत्ति/उत्तराधिकार में बाधा, राजनीतिक भागीदारी सीमित, हिंसा/उत्पीड़न।
अंतर-अंतराल:
जाति, वर्ग, विकलांगता आदि से भेद कई गुना हो सकता है।
उपाय:
समान वेतन/विरासत कानून, लैंगिक बजट, देखभाल-अवसंरचना, सुरक्षित कार्यस्थल, शिक्षा/स्किलिंग, मीडिया/पाठ्यचर्या से मान्यताओं में बदलाव।