Question:

किसी भी ताल की पहली मात्रा कहलाती है।

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ताल की संरचना में 'सम' का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह ताल का केंद्र बिंदु होता है और सभी संगीतकार इसी के आधार पर ताल का पालन करते हैं।
  • खाली
  • ताली
  • सम
  • विभाग
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

स्पष्टीकरण: किसी भी ताल की पहली मात्रा को 'सम' कहा जाता है। सम वह बिंदु है जहाँ ताल की शुरुआत होती है और इसे ताल का प्रमुख बिंदु माना जाता है। सम पर ताली बजती है, जो ताल की लयबद्धता और संरचना को स्थिर करती है। सम पर ताली बजने से पूरे ताल की गिनती का आभास होता है, और सभी अन्य मात्राएँ इसी सम के सापेक्ष गिनी जाती हैं। अन्य मात्राएँ या तो ताली (जो ताल के विशेष बिंदुओं पर बजती हैं) या खली (जो कुछ अंतराल पर होती हैं) के रूप में आती हैं, लेकिन सम हमेशा ताल का केंद्रीय बिंदु होता है। सम की पहचान और इसका सही प्रयोग ताल की मूल संरचना और लय के संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना सम के, ताल का संतुलन टूट सकता है और उसकी धारा खो सकती है। इसलिए, सम किसी भी ताल का आधार और दिशा-निर्देश होता है, जो शास्त्रीय संगीत की लयबद्धता को बनाए रखने में सहायक होता है।
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