स्पष्टीकरण:
झपताल में कुल 10 मात्राएँ होती हैं, जो इसे एक दस मात्राओं का ताल बनाती है। झपताल का प्रयोग मुख्यतः ध्रुपद और खयाल गायन में किया जाता है, जहाँ इसकी लयबद्धता और गहरे प्रभाव का पूरा उपयोग होता है।
झपताल की विशेषता यह है कि इसकी दूसरी ताली पहली मात्रा पर होती है, जिससे ताल की लयबद्धता स्पष्ट होती है। जब ताली पहली मात्रा पर होती है, तो ताल की गिनती और लय को सही दिशा मिलती है, जिससे पूरे ताल का स्वरूप संगठित और व्यवस्थित बनता है। यह विशेषता ताल के प्रति एक स्थिरता और संतुलन प्रदान करती है।
झपताल का यह लय और गहरी संगीतमयता शास्त्रीय संगीत में अत्यधिक प्रभावशाली होती है, और इसे मध्यम गति के रचनाओं में बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। इसके व्यावहारिक उपयोग से संगीत में गतिशीलता और स्थिरता का आदान-प्रदान होता है, जिससे श्रोताओं पर एक गहरा प्रभाव पड़ता है।
इस प्रकार, झपताल में 10 मात्राएँ होती हैं, और इसकी दूसरी ताली पहली मात्रा पर होने से ताल की लयबद्धता को मजबूती मिलती है।