इनमें से कौन शब्दालंकार नहीं है?
शब्दालंकार काव्यशास्त्र में वह अलंकार होते हैं जो शब्दों के प्रयोग से उत्पन्न होते हैं। 'श्लेष', 'यमक', और 'अनुप्रास' शब्दालंकार के उदाहरण हैं। श्लेष: जब एक शब्द के दो अर्थों का प्रयोग किया जाता है। यमक: जब एक ही शब्द का पुनरावृत्ति होती है, लेकिन उसका अर्थ बदलता है। अनुप्रास: जब समान ध्वनियों का पुनरावृत्ति होती है। लेकिन 'उपमा' एक रूपक अलंकार है, न कि शब्दालंकार, क्योंकि यह तुलना (comparison) पर आधारित होता है, जैसे "राम की तरह".
‘रूपक’ अलंकार का उदाहरण संस्कृत में लिखिए।
‘उपमा’ अलंकार की परिभाषा हिंदी या संस्कृत में लिखिए।
अधोलिखित में से किसी एक श्लोक की हिंदी में सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
पुराणश्री: पुरस्त्वतां प्रवेश्य पौरशिन्ध्यान्मन्।
भुजे भुजंस्त्रसमानारो यथ: स भूमृधीरसस्मजज
अधोलिखित में से किसी एक श्लोक की हिंदी में सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
एतावदुक्त्वा विरते मृगेन्द्रे प्रतिक्वेना गृहाणते।
सिलोन्यवोऽपि क्षितिपालमुखे: प्रियया तमेवाभिमृच्छते॥
उपमालङ्कारस्य लक्षणम् एतत् क्रमेण व्यवस्थापयत ।
(A) उपमा
(B) वाक्यैक्य
(C) साम्यम्
(D) द्वयोः
(E) वाच्यमवैधर्म्यम्
अधोलिखितेषु विकल्पेषु उचिततमम् उत्तरं चिनुत-