स्पष्टीकरण:
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रमुख सैद्धांतिक ग्रंथकार पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे ने कुल 10 थाटों का वर्गीकरण प्रस्तुत किया। पंडित भातखण्डे का यह योगदान भारतीय संगीत में एक मील का पत्थर माना जाता है, क्योंकि उन्होंने संगीत के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया और भारतीय शास्त्रीय संगीत की जटिल संरचनाओं को सरल किया।
यह 10 थाट विभिन्न रागों के आधार होते हैं और इनका वर्गीकरण रागों की संरचना को समझने में सहायक है। प्रत्येक थाट में विशिष्ट स्वरों का उपयोग किया जाता है, जो रागों को विभिन्न भावनाओं और गुणों के साथ जोड़ते हैं। पंडित भातखण्डे के अनुसार, थाट केवल एक लय या स्वर नहीं, बल्कि पूरे राग की संरचना का आधार होता है, जो राग के भाव और रंग को व्यक्त करता है।
भातखण्डे का यह वर्गीकरण संगीत के छात्रों और शास्त्रीय संगीतज्ञों के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इससे रागों को समझने और उन्हें सही ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिलती है। उनके द्वारा प्रस्तुत यह थाट प्रणाली आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में कार्य करती है।
उनके द्वारा किए गए इस वर्गीकरण से संगीत के अध्ययन में एक नई दिशा खुली और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा को व्यवस्थित करने में एक मील का पत्थर साबित हुआ।