Question:

‘भरत राम का प्रेम’ प्रसंग के आधार पर लिखिए कि भरत स्वयं को सभी अनर्थों का मूल क्यों मानते हैं। 
 

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भरत के चरित्र को विश्लेषित करते समय उनके आत्मत्याग, भाईचारे और विनम्रता के भाव को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें। पादुका शासन का उल्लेख भरत की भक्ति और मर्यादा को प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘भरत राम का प्रेम’ प्रसंग में भरत की भक्ति, विनम्रता और आत्मग्लानि अत्यंत मार्मिक रूप में प्रकट होती है। जब भरत राम से मिलने चित्रकूट पहुँचते हैं, तो वे स्वयं को सभी अनर्थों — जैसे वनवास, राज्य संकट, और पारिवारिक पीड़ा — का कारण मानते हैं। वे मानते हैं कि यदि वे जन्म न लेते, तो कैकेयी को कोई भी स्वार्थ उपजता ही नहीं और राम को वनवास नहीं जाना पड़ता।

भरत का यह भाव अत्यंत उच्चकोटि का त्याग और प्रेम दर्शाता है। वे न केवल राम से राज्य लेने से इनकार करते हैं, बल्कि उनकी पादुका सिर पर रखकर राज्य का संचालन करते हैं, जो यह दिखाता है कि वह सत्ता के नहीं, केवल राम के चरणों के भक्त हैं। भरत का यह प्रेम उन्हें मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक बना देता है।

इस प्रकार भरत का “स्वयं को सभी अनर्थों का मूल” मानना उनका विनम्र, त्यागमयी और आत्मद्रष्टा स्वरूप उजागर करता है।
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