चरण 1: योजना की पृष्ठभूमि समझें।
बालिका समृद्धि योजना (BSY) भारत सरकार द्वारा 1997 में शुरू की गई एक सामाजिक सुरक्षा/शिक्षा–प्रोत्साहन योजना थी। लक्ष्य था—गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों में जन्मी बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहन, शिक्षा में निरंतरता और शिशु/बाल विवाह की रोकथाम।
चरण 2: इसकी प्रमुख विशेषताएँ याद रखें।
(क) जन्म के समय एक नकद अनुदान (प्रारम्भ में ₹500) दिया जाता था।
(ख) कक्षा I से X तक वार्षिक छात्रवृत्ति—कक्षा बढ़ने के साथ राशि बढ़ती।
(ग) लाभार्थी प्रायः ICDS/आंगनवाड़ी ढाँचे के माध्यम से पंजीकृत होती थीं, और 18 वर्ष से पहले विवाह न करने जैसी शर्तें भी जुड़ी रहती थीं।
इन विशेषताओं से स्पष्ट है कि यह कंडीशनल कैश सपोर्ट मॉडल था जो बालिका की शिक्षा व कल्याण पर केन्द्रित था।
चरण 3: विकल्पों का उन्मूलन।
2010–11 में इस नाम से नई राष्ट्रीय शुरुआत नहीं हुई; 2015–16 के आसपास अन्य कार्यक्रम (जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का विस्तार, सुकन्या समृद्धि खाता 2015) सुर्खियों में आए, पर वे भिन्न योजनाएँ हैं। अतः आरम्भ वर्ष 1997 ही सही है।