Question:

युवाओं में सेल्फ़ी (अपनी तस्वीर खुद लेना) की बढ़ती लत — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए: 
 

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रचनात्मक लेखन में यथार्थ, अनुभव और दृष्टिकोण का सशक्त मिश्रण लेख को प्रभावशाली बनाता है — और तथ्यात्मक उदाहरणों से बात विश्वसनीय होती है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘‘पहले हम आईने में खुद को देखते थे, अब मोबाइल में खुद को दिखाते हैं’’ — यह पंक्ति आज के युवाओं की मानसिकता को बखूबी दर्शाती है। आधुनिक युग में सेल्फ़ी एक कला से अधिक एक आदत बन गई है और अब यह धीरे-धीरे लत का रूप धारण कर रही है।
हर नया दिन, नया फ़िल्टर, नया पोज़ और एक नई तस्वीर — युवाओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लाइक्स और कमेंट्स पाने की होड़ ने ‘ख़ुद की तस्वीर’ को ‘ख़ुद के अस्तित्व’ से अधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया है।
इस डिजिटल आत्म-मुग्धता ने जहाँ आत्म-विश्वास को बढ़ाया है, वहीं आत्म-केन्द्रितता को भी जन्म दिया है।
ख़ासकर किशोरों में यह प्रवृत्ति चिंता का विषय बन चुकी है। आत्म-मूल्यांकन अब स्क्रीन के सामने खड़े होने से होता है, न कि भीतर झाँकने से। सेल्फ़ी लेने के लिए जोखिम भरे स्थानों पर जाकर जान गंवा देना — यह लत का सबसे भयावह रूप है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ‘सेल्फ़ीटिस’ को एक व्यवहारिक विकार माना है।
हमें यह समझना होगा कि सेल्फ़ी लेना ग़लत नहीं, पर उसका जुनून हानिकारक है।
वास्तविक आत्म-संतोष स्क्रीन पर नहीं, स्वभाव में होता है। युवाओं को चाहिए कि वे इस लत को सीमित करें और आभासी नहीं, वास्तविक संबंधों को महत्त्व दें।
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