स्पष्टीकरण:
राग यमन में तीव्र मध्यम (तीव्र म) का प्रयोग होता है, जो इसे अन्य रागों से विशिष्ट बनाता है। यह राग कल्याण थाट से संबंधित है, और इसकी संरचना में तीव्र मध्यम की महत्वपूर्ण भूमिका है। तीव्र मध्यम का प्रयोग राग यमन को एक विशिष्ट और गंभीर ध्वनि प्रदान करता है, जो इसके भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।
राग यमन मुख्य रूप से संध्या समय (शाम के समय) गाया जाता है, क्योंकि यह समय राग की भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उपयुक्त होता है। संध्या के समय वातावरण में जो शांति और गंभीरता होती है, वह राग यमन के स्वर और लय के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।
तीव्र मध्यम का प्रयोग राग यमन के स्वरूप को एक विशेष दिशा में ले जाता है, जिससे यह राग अन्य रागों से अलग पहचान बनाता है। इसकी प्रस्तुति में विशेष रूप से संयम, धैर्य, और एक गहरी भावनात्मकता की आवश्यकता होती है। राग यमन का यह रूप श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालता है, और इसे सुनते समय एक प्रकार की आध्यात्मिक शांति और मानसिक संतुलन का अनुभव होता है।
इस प्रकार, राग यमन की संरचना, तीव्र मध्यम के प्रयोग और संध्या समय में इसके गायन की विशेषताएँ इसे एक अद्वितीय और प्रभावशाली राग बनाती हैं।