चरण 1: अवधारणा समझें।
रूढ़िगत/परम्परागत कानून (Customary Law) वे नियम हैं जो समुदाय की दीर्घकालीन प्रथाओं, रीतियों और लोक-मान्यताओं से बने होते हैं—अधिकतर अलिखित, मौखिक और सामुदायिक स्वीकृति से मान्य। इनके प्रवर्तन में पंचायत/कबीलाई परिषद, बुज़ुर्ग या कबीला-प्रधान जैसे अनौपचारिक न्याय-तंत्र काम करते हैं।
चरण 2: समाज-प्रकार से सम्बन्ध।
ऐसे कानून आदिम, जनजातीय तथा कृषक (peasant) समाजों में प्रबल होते हैं, जहाँ सामाजिक सम्बन्ध निकट-सम्बन्धी, गाँव/कबीले की एकजुटता और परम्पराओं पर टिके होते हैं। यहाँ विवाद-निवारण का उद्देश्य दंड से अधिक समरसता/समाधान होता है।
चरण 3: अन्य विकल्प क्यों नहीं।
औद्योगिक/आधुनिक/जटिल समाजों में राज्य-निर्मित संहिताबद्ध (statutory) कानून, अदालतें और औपचारिक पुलिस-तंत्र हावी रहते हैं; customary law का क्षेत्र सीमित हो जाता है। अतः सही उत्तर विकल्प (3) है।