स्पष्टीकरण:
राग देश एक प्रमुख और प्रसिद्ध राग है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशेष स्थान रखता है। यह राग खमाज थाट पर आधारित होता है और इसकी प्रस्तुति आमतौर पर रात के समय की जाती है। राग देश के वादी स्वर 'रे' (ऋषभ) और सम्वादी स्वर 'प' (पंचम) होते हैं, जो इसके संगीतात्मक संरचना का मुख्य आधार हैं।
इस राग में 'रे' (ऋषभ) स्वर का उपयोग अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह राग के स्वर-मेलोडी को स्थिरता प्रदान करता है और राग की भावनात्मक गहराई को व्यक्त करता है। वहीं, 'प' (पंचम) स्वर राग के सम्वादी स्वर के रूप में कार्य करता है, जो राग की मधुरता और आकर्षण को बढ़ाता है। इन दो स्वरों का संयोजन राग के संगीतात्मक अनुभव को संपूर्णता प्रदान करता है।
राग देश की भाव-प्रस्तुति में विशेष रूप से देशभक्ति और उल्लास की भावना होती है। इसे सुनते समय एक प्रकार का उत्साह और राष्ट्रीय गौरव का अनुभव होता है, जो श्रोताओं को भारतीय संस्कृति और समृद्ध इतिहास के प्रति गर्व से भर देता है। राग के स्वर और लय इस प्रकार से सुसंगत होते हैं कि वे शांति, आनंद और उल्लास का माहौल उत्पन्न करते हैं।
राग देश के गायक और वादक इसे रात के समय प्रस्तुत करते हैं, क्योंकि यह समय राग की भावनाओं और प्रभाव को सही प्रकार से व्यक्त करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। राग देश का समग्र प्रभाव श्रोताओं पर गहरा और सकारात्मक पड़ता है, और यह राग भारतीय संगीत में अपनी विशिष्टता और प्रभाव के लिए प्रसिद्ध है।