स्पष्टीकरण:
राग बिलावल का गायन मुख्यतः दोपहर के समय किया जाता है, क्योंकि यह समय राग के भाव और स्वरूप को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करने के लिए उपयुक्त होता है। राग बिलावल बिलावल थाट पर आधारित है, और इसका स्वरूप शांति, संतुलन और प्रसन्नता का प्रतीक होता है।
राग बिलावल का संगीत हृदय को प्रसन्न करने वाला होता है और इसके भावों में सकारात्मकता और आनंद की भावना प्रकट होती है। यह राग श्रोताओं को मानसिक शांति और आनंद प्रदान करता है, और इसकी ध्वनियाँ वातावरण में एक सुखद और ताजगी से भरपूर अनुभव उत्पन्न करती हैं।
बिलावल थाट के अंतर्गत आने वाले रागों का स्वरूप सामान्यतः हल्का, सुखद और साफ होता है, और राग बिलावल इस थाट का आदर्श उदाहरण है। इस राग में स्वर संयमित होते हैं, जिससे इसकी प्रस्तुति में एक सुखद लय और हल्की-फुल्की ऊर्जा का अहसास होता है।
इस प्रकार, राग बिलावल का गायन विशेष रूप से दोपहर के समय किया जाता है, और यह राग शांत एवं प्रसन्नता प्रदर्शित करता है, जिससे श्रोताओं में ताजगी और आनंद का संचार होता है।