चरण 1: ऐतिहासिक तथ्य।
महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फूले (1827–1890) ने 1873 में पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य था—ब्राह्मणवादी ऊँच-नीच, जाति-भेद और अंधविश्वास का विरोध, तथा शूद्र–अतिशूद्रों और स्त्रियों में शिक्षा व आत्मसम्मान को बढ़ाना।
चरण 2: प्रमुख कार्य।
फूले दम्पति ने लड़कियों और विधवाओं के लिए स्कूल खोले; अंतरजातीय/विधवा विवाह को समर्थन दिया; सादा विवाह और सामाजिक सुधारों पर बल दिया। समाज में सत्य (तर्क, शिक्षा, समानता) की खोज ही इसका नाम और मकसद था—धर्म-आडंबर के बजाय समता।
चरण 3: अन्य विकल्प क्यों नहीं।
(2) पिछड़ा वर्ग संघ—डा. बी.आर. अम्बेडकर से सम्बद्ध संगठनों/आन्दोलनों का संदर्भ आता है, फूले द्वारा स्थापित नहीं। (3) दलित महासभा—विभिन्न समयों में बने मंच, पर फूले की स्थापना नहीं। (4) हरिजन सेवक समाज—महात्मा गांधी ने 1932 में स्थापित किया। अतः एकमात्र सही विकल्प सत्यशोधक समाज है।