चरण 1: अवधारणा समझें।
मानवशास्त्री रैडक्लिफ-ब्राउन ने नातेदारी में एक खास प्रकार की संस्थाबद्ध रीति बताई जिसे परिहास सम्बन्ध (Joking relationship) कहते हैं। इसमें दो रिश्तेदारों के बीच हँसी–मज़ाक, छेड़छाड़, हल्की चुटकी और अनौपचारिकता सामाजिक रूप से अनुमत तथा स्वीकार्य होती है।
चरण 2: उद्देश्य क्या है?
ऐसी रीति तनाव-नियंत्रण का साधन बनती है, निकटता बढ़ाती है और संयमित मज़ाक के माध्यम से वर्जनाओं को सुरक्षित दायरे में रखती है। कई समाजों में देवर–भाभी, जीजा–साली, क्रॉस-कज़िन आदि के बीच यह परम्परा दिखती है, जहाँ औपचारिक दूरी कम कर सामाजिक एकजुटता बढ़ती है।
चरण 3: भेद स्पष्ट करें।
विकल्प (1) का परिहार सम्बन्ध (Avoidance relationship) इसका उल्टा है—यहाँ मिलना-जुलना, मज़ाक या प्रत्यक्ष संवाद सीमित/निषिद्ध होता है (जैसे ससुर–बहू)। विकल्प (3) संबोधन-रीतियों से जुड़ा है; (4) सामान्य सह-निवास/परिवारजन का संकेत दे सकता है, पर मज़ाक की संस्थाबद्ध अनुमति नहीं बताता। इसलिए सही उत्तर परिहास सम्बन्ध है।