स्पष्टीकरण:
राग यमन में दोनों मध्यम स्वर (शुद्ध म और तीव्र म) का प्रयोग होता है, जो इसे एक विशिष्ट और प्रभावशाली राग बनाता है। राग यमन में शुद्ध मध्यम (म) और तीव्र मध्यम (म’) दोनों स्वर होते हैं, और इनका सही स्थान पर उपयोग राग के भाव और प्रभाव को गहरे तरीके से व्यक्त करता है।
शुद्ध मध्यम (म) राग यमन में स्थिरता और शांति का अहसास कराता है, जबकि तीव्र मध्यम (म’) इसका स्वरूप और प्रभाव तीव्र बनाता है, जो राग के भाव को और भी जीवंत और गतिशील बनाता है। इस प्रकार, राग यमन में दोनों मध्यम स्वर का संगम इसे एक अद्वितीय और आकर्षक राग बनाता है।
राग यमन का गायन रात्रि के समय किया जाता है, और इसकी संरचना श्रोताओं में एक भावनात्मक संतुलन और गहराई उत्पन्न करती है। राग यमन की ये विशेषताएँ उसे भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध राग बनाती हैं।
इस प्रकार, राग यमन में शुद्ध और तीव्र मध्यम दोनों स्वरों का प्रयोग होता है, जो इसे अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है।