चरण 1: क्रय विवाह की परिभाषा।
क्रय विवाह का अर्थ है ऐसा विवाह जहाँ वरपक्ष वधूपक्ष को धन-संपत्ति देकर वधू को प्राप्त करे; यानी विवाह का आधार लेन–देन/खरीद जैसा आदान-प्रदान हो।
चरण 2: मनुस्मृति के आठ रूपों का सन्दर्भ।
आठ प्राचीन रूप—ब्राह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य, असुर, गान्धर्व, राक्षस, पैशाच। इनमें असुर विवाह में वधू के पिता/परिवार को प्रचुर धन-वस्तु देकर कन्या ग्रहण की जाती है, इसलिए इसे ही क्रय विवाह कहा गया।
चरण 3: अन्य विकल्पों से भेद स्पष्ट करें।
आर्ष में वरपक्ष द्वारा दो गाय जैसे प्रतीकात्मक दान दिया जाता है—यह लेन-देन का पूर्ण क्रय नहीं, एक धार्मिक मान्यता-जन्य उपहार है। राक्षस बलपूर्वक हरण कर विवाह करना तथा पैशाच नीचता/छल से सम्बन्ध स्थापित करने को दर्शाता है; ये क्रय की परिभाषा में नहीं आते।
निष्कर्ष: क्रय विवाह = असुर विवाह।