चरण 1: परम्परागत व्यवस्था समझें।
हिन्दू समाज में व्यवस्थित विवाह (arranged marriage) में रिश्ते अक्सर परिजन/मध्यस्थों द्वारा तय किए जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से वधूपक्ष (लड़की वाले) ही वरपक्ष से संपर्क कर विवाह-प्रस्ताव रखते हैं।
चरण 2: कारण/समाजशास्त्रीय संदर्भ।
(क) वर-प्रधानता की संस्कृति—वर का सामाजिक/आर्थिक स्थान उँचा माने जाने से वधूपक्ष पहल करता है।
(ख) कुटुम्ब-नियंत्रित विवाह—गोत्र, जाति, आंचलिकता, शिक्षा आदि मानदंड वधूपक्ष मिलान कर प्रस्ताव रखता है।
(ग) दहेज/आर्थिक अपेक्षाएँ—परम्परागत ढाँचे में दहेज/उपहार भी वधूपक्ष की ज़िम्मेदारी मानी गई, इसलिए वही वार्ता खोलते हैं।
चरण 3: समकालीन परिवर्तन।
शहरीकरण, शिक्षा और लव/स्वयं-विवाह, ऑनलाइन मैट्रिमोनियल मंचों से दोनों पक्ष पहल कर सकते हैं; फिर भी परीक्षाओं/भर्ती जैसे पारम्परिक MCQ में मानक उत्तर ``लड़की वाले'' ही माना जाता है।