स्पष्टीकरण:
गीत का दूसरा भाग 'अंतरा' कहलाता है। यह गीत के मुख्य विषय और भाव को विस्तार देने का कार्य करता है। अंतरा गीत का वह हिस्सा होता है, जिसमें संगीत और शब्दों के द्वारा गीत के भावनात्मक और कथात्मक पक्ष को और गहराई से प्रस्तुत किया जाता है।
गीत का पहला भाग 'स्थायी' होता है, जो गीत की संरचना का आधार और स्थिर हिस्सा होता है। स्थायी गीत के मुख्य ध्वनि और भाव का परिचायक होता है, जबकि अंतरा गीत के उस भाव को विस्तार देता है और उसे और अधिक गहरे रूप में प्रस्तुत करता है।
अंतरे के माध्यम से गीत के स्वर, राग, और विषय को एक नई दिशा और गहराई मिलती है, जिससे श्रोताओं पर एक विशेष प्रभाव पड़ता है। यह गीत को विविधता और गतिशीलता प्रदान करता है, और गीत के भावनात्मक प्रभाव को और अधिक तीव्र करता है।
इस प्रकार, अंतरा गीत के मुख्य भाव को विस्तार देता है और उसे श्रोताओं के लिए और भी अधिक प्रभावी बना देता है।