स्पष्टीकरण:
डॉ. एन. राजम हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक प्रमुख और प्रसिद्ध वायलिन वादक हैं। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपने अनूठे योगदान के लिए जानी जाती हैं। डॉ. राजम ने वायलिन को 'गायकी अंग' शैली में प्रस्तुत करने का अद्वितीय प्रयास किया।
'गायकी अंग' शैली, जिसमें संगीत को गायन की तरह प्रस्तुत किया जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक महत्वपूर्ण पहलू है। गायकी अंग में संगीत के स्वर और लय को उस तरीके से प्रस्तुत किया जाता है जैसे वह गायन में होता है, न कि केवल वाद्य के रूप में। डॉ. राजम ने इस शैली को वायलिन पर साकार किया, जिससे वायलिन का प्रभाव और ध्वनि गायन के समान हो गई, और यह शास्त्रीय संगीत में एक नया मुकाम बन गया।
इस प्रकार, डॉ. एन. राजम ने वायलिन को शास्त्रीय संगीत के एक महत्त्वपूर्ण वाद्य के रूप में प्रस्तुत कर उसे भारतीय संगीत में एक नया स्थान दिलाया। उन्होंने न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिमी वाद्ययंत्र वायलिन के माध्यम से एक नया रूप दिया, बल्कि अपनी अनोखी शैली और तकनीक के द्वारा इस वाद्य को भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक नया रंग और समृद्धि भी दी।
उनकी विशिष्टता यह रही कि उन्होंने वायलिन के माध्यम से रागों की बारीकियों और भावनाओं को उस विशिष्टता के साथ व्यक्त किया जैसे वे गायन में व्यक्त होते हैं। उनके योगदान को भारतीय संगीत जगत में गहरे सम्मान से देखा जाता है, और वे वायलिन के क्षेत्र में एक अग्रणी और प्रेरणास्त्रोत वादक मानी जाती हैं।