चरण 1: ऐतिहासिक संदर्भ।
उन्नीसवीं सदी के आरम्भ में बंगाल में सती प्रथा (पति की चिता पर पत्नी को जला देना) व्यापक थी। राजा राममोहन राय (1772–1833) ने इसे अनैतिक, अमानवीय और वैदिक परम्परा के विपरीत बताते हुए समाज और शासकों को सक्रिय रूप से जागरूक किया।
चरण 2: सुधार प्रयास।
राय ने लेख, याचिकाएँ और जनमत संगठित कर गवर्नर-जनरल लार्ड बेंटिक पर क़दम उठाने का दबाव बनाया। इसके परिणामस्वरूप 1829 में सती निषेध विनियमन (Regulation XVII) जारी हुआ, जिसने सती को दंडनीय अपराध घोषित किया।
चरण 3: अन्य व्यक्तित्व क्यों नहीं।
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने मुख्यतः विधवा विवाह के लिए संघर्ष किया; गाँधी और एनी बेसेन्ट का समय बाद का है। सती प्रथा के विरुद्ध सबसे पहले और निर्णायक आवाज़ राजा राममोहन राय की मानी जाती है।