स्पष्टीकरण:
राग भैरवी में कुल 6 स्वर प्रयुक्त होते हैं, जो इस राग की विशिष्टता और सुंदरता को दर्शाते हैं। यह राग भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रिय राग है, जिसे विशेष रूप से भक्ति और गंभीर भावनाओं के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
राग भैरवी में प्रयुक्त स्वर कुछ हद तक प्रकृत स्वरों से भिन्न होते हैं। इसमें ऋषभ (R) और धैवत (D) का स्वर कुछ तद्रूप या परिवर्तित किया जाता है, जिससे इस राग का संगीत एक अलग रंग और भाव उत्पन्न करता है। इस प्रकार, राग भैरवी की स्वर-रचना में इन स्वरों के विशेष उपयोग से राग को एक गहरी और सजीव अभिव्यक्ति मिलती है।
राग भैरवी का गायन आमतौर पर प्रातःकाल किया जाता है, और इसके स्वर शांति, भक्ति, और आत्मिक संतुलन का अहसास कराते हैं। राग के स्वर और इसकी संरचना श्रोताओं को मानसिक शांति और ध्यान की स्थिति में ले जाते हैं, जिससे इसे भारतीय संगीत में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
इस प्रकार, राग भैरवी में 6 स्वर प्रयुक्त होते हैं, और इसके स्वर कुछ प्रकृत स्वरों से भिन्न होते हैं, जो इसे एक विशिष्ट और प्रभावी राग बनाते हैं।