स्पष्टीकरण:
औडव-संपूर्ण जाति के रागों में आरोह (चढ़ाव) में 6 स्वर होते हैं, जबकि अवरोह (उतराव) में सम्पूर्ण 7 स्वर होते हैं। यह रागों की स्वर-रचना को दर्शाता है, और यह रागों की संरचना में एक विशिष्ट विशेषता है।
औडव-संपूर्ण जाति के रागों का आरोह और अवरोह में भिन्नता राग के संगीत में विशिष्टता और गतिशीलता प्रदान करती है। आरोह में 6 स्वर होते हैं, जिससे राग में एक सीमित और संक्षिप्त चढ़ाव होता है, जो राग के स्वर के शुरूआत को नियंत्रित करता है। वहीं, अवरोह में 7 स्वर होने से राग में उतरते समय एक पूर्ण और व्यापक स्वर-धारा होती है, जो राग को गहरी और संतुलित ध्वनि प्रदान करती है।
यह संरचना राग के भाव और प्रभाव को विशेष रूप से आकार देती है। आरोह और अवरोह के इन भिन्न स्वरों के कारण राग में उन्नति और अवनति के बीच एक संतुलन और लयात्मकता होती है, जो शास्त्रीय संगीत की धारा को और भी प्रभावी बनाती है।
इस प्रकार, औडव-संपूर्ण जाति के रागों की स्वर-रचना आरोह में 6 और अवरोह में 7 स्वरों के विशिष्ट संतुलन को दर्शाती है, जो राग के भाव, भावना और संगीतमयता को बढ़ाता है।